The Lost Art of Closing (Hindi)


क्या आप अभी भी पुराने जमाने की तरह सेल्स क्लोज करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। अगर आप कस्टमर के पीछे पड़कर उसे परेशान करते हैं तो मुबारक हो आप अपनी डील खुद ही बर्बाद कर रहे हैं। बिना इन १० कमिटमेंट्स के आपकी सेल्स पिच किसी रद्दी पेपर से ज्यादा कुछ नहीं है।

आज हम एन्थनी इयानेरिनो की किताब द लॉस्ट आर्ट ऑफ क्लोजिंग की मदद से समझेंगे कि सेल्स में असली बॉस कैसे बनते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपकी सेल्स गेम को हमेशा के लिए बदल देंगे।


लेसन १ : क्लोजिंग कोई जादुई बटन नहीं बल्कि एक सीढ़ी है

अगर आपको लगता है कि सेल्स क्लोज करना किसी फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा है जहाँ आप आखिर में कोई जादुई लाइन बोलेंगे और कस्टमर अपना बटुआ खोलकर बैठ जाएगा तो भाई आप गलत दुनिया में जी रहे हैं। असल जिंदगी में सेल्स क्लोज करना कोई एक बार का धमाका नहीं है। यह तो एक लंबी सीढ़ी चढ़ने जैसा है। एन्थनी इयानेरिनो साफ कहते हैं कि अगर आप सीधे आखिरी स्टेप पर कूदने की कोशिश करेंगे तो आपका गिरना तय है। सोचिए आप किसी अनजान लड़की से पहली बार मिलते हैं और बिना हाय हेलो किए सीधे शादी का प्रपोजल दे देते हैं। क्या होगा। या तो थप्पड़ पड़ेगा या फिर वह आपको पागल समझकर भाग जाएगी। सेल्स में भी हम यही गलती करते हैं। हम अभी कस्टमर से मिले नहीं कि उसे प्रोडक्ट चिपकाने की कोशिश करने लगते हैं। यह बहुत ही अजीब और डरावना व्यवहार है।

हमें समझना होगा कि क्लोजिंग दरअसल छोटे छोटे १० कमिटमेंट्स का एक कलेक्शन है। आपको पहली मीटिंग से लेकर आखिरी साइन तक हर मोड़ पर कस्टमर से एक छोटा वादा लेना पड़ता है। मान लीजिए आप एक प्रॉपर्टी डीलर हैं। आप कस्टमर को फोन करते ही यह नहीं कहते कि भाई साहब ५ करोड़ का बंगला ले लो। पहले आप उससे वक्त मांगते हैं। यह पहला कमिटमेंट है। फिर आप उसे साइट दिखाने ले जाते हैं। यह दूसरा कमिटमेंट है। अगर आप सीधे पैसे की बात करेंगे तो कस्टमर आपको ब्लॉक कर देगा और आप अपने फोन को देखते रह जाएंगे। आज के दौर में लोग बेचे जाने से नफरत करते हैं लेकिन उन्हें खरीदना पसंद है। जब आप जबरदस्ती क्लोज करने की कोशिश करते हैं तो आप किसी ऐसे जिद्दी रिश्तेदार की तरह लगते हैं जो जबरदस्ती शादी में पनीर खिलाने की कोशिश करता है।

असली सेल्समैन वह है जो कस्टमर का हाथ पकड़कर उसे एक एक कदम आगे ले जाता है। हर स्टेप पर कस्टमर को यह लगना चाहिए कि वह अपनी मर्जी से आगे बढ़ रहा है। जब आप उसे वक्त देने का वादा लेते हैं तो आप उसकी नजर में अपनी वैल्यू बढ़ाते हैं। जब आप उसे उसकी समस्या समझाने के लिए राजी करते हैं तो आप एक एक्सपर्ट की तरह दिखते हैं। और जब आप उसे समाधान दिखाते हैं तो वह खुद ही आपसे अगला स्टेप पूछता है। अगर आप इन छोटे कमिटमेंट्स को इग्नोर करेंगे तो अंत में आपको सिर्फ ना सुनने को मिलेगी। फिर आप बैठकर अपनी किस्मत को कोसेंगे जबकि गलती आपकी अपनी थी। सेल्स एक आर्ट है और इसे तरीके से करना ही समझदारी है। अब जब आप समझ गए हैं कि यह एक सीढ़ी है तो चलिए देखते हैं कि इस सीढ़ी पर चढ़ने के लिए आपको कस्टमर को क्या ऑफर करना पड़ता है।


लेसन २ : वैल्यू दिए बिना कुछ मांगना गुनाह है

आजकल के सेल्स वाले बंदे भी बड़े कमाल के होते हैं। वे आपके पास ऐसे आते हैं जैसे आप उनके बचपन के बिछड़े हुए अमीर चाचा हों जो बस अपनी जायदाद उनके नाम करने के लिए बैठे हैं। वे आपसे आपका कीमती वक्त मांगेंगे। वे आपकी जानकारी मांगेंगे। और अंत में वे आपका पैसा भी मांगेंगे। लेकिन बदले में वे आपको क्या दे रहे हैं। ज्यादातर मामलों में सिर्फ एक बोरिंग प्रेजेंटेशन और ढेर सारा सिरदर्द। एन्थनी इयानेरिनो कहते हैं कि सेल्स की दुनिया में यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। अगर आप कस्टमर से उसका समय मांग रहे हैं तो आपको उसे उतनी वैल्यू भी देनी पड़ेगी। वरना वह आपको किसी अनचाहे सेल्स कॉल की तरह इग्नोर कर देगा। सोचिए अगर कोई भिखारी आपके पास आए और कहे कि भाई साहब मुझे १००० रुपये दे दो क्योंकि मुझे आईफोन खरीदना है। आप क्या करेंगे। आप हंसेंगे और आगे बढ़ जाएंगे क्योंकि उस सौदे में आपके लिए कोई वैल्यू नहीं है।

सेल्स में वैल्यू का मतलब सिर्फ डिस्काउंट देना नहीं होता। असली वैल्यू तब होती है जब आप कस्टमर को वह बात बताते हैं जो उसे पहले से नहीं पता थी। अगर आप उसे सिर्फ वही चीजें बता रहे हैं जो उसकी वेबसाइट पर पहले से लिखी हैं तो आप उसका टाइम बर्बाद कर रहे हैं। आपको एक डॉक्टर की तरह बनना होगा। डॉक्टर कभी यह नहीं कहता कि मेरी दवा खरीद लो क्योंकि मुझे कमीशन चाहिए। वह पहले आपकी बीमारी पकड़ता है। वह आपको समझाता है कि अगर आपने यह इलाज नहीं कराया तो आपकी हालत कितनी बिगड़ सकती है। तब आप खुशी खुशी उसे फीस देते हैं। यहाँ वैल्यू आपकी सेहत है। सेल्स में भी यही होता है। जब तक आप कस्टमर को यह महसूस नहीं कराते कि आपके साथ १० मिनट बात करने से उसका कोई बड़ा फायदा हुआ है तब तक वह आपसे अगला कमिटमेंट कभी नहीं करेगा।

बहुत से सेल्समेन को लगता है कि वे बहुत चालाक हैं। वे मीठी मीठी बातें करके कस्टमर को जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। लेकिन भाई साहब आज का कस्टमर आपसे चार कदम आगे है। उसे पता है कि आप उसे मक्खन लगा रहे हैं। जब आप बिना किसी तैयारी के मीटिंग में जाते हैं और बस अपना कैटलॉग दिखाने लगते हैं तो आप किसी ऐसे बिन बुलाए मेहमान की तरह होते हैं जो बस फ्री का खाना खाने आया है। अगर आपको डील जीतनी है तो आपको होमवर्क करना पड़ेगा। आपको कस्टमर की परेशानियों को उनसे बेहतर समझना होगा। जब आप उन्हें यह दिखाते हैं कि आपके पास उनकी समस्या का असली समाधान है तब वे खुद आपको फोन करेंगे। याद रखिए मांगना आसान है लेकिन देने की काबिलियत रखना ही असली सेल्समैन की पहचान है। बिना वैल्यू क्रिएट किए क्लोजिंग की उम्मीद करना वैसा ही है जैसे बिना बीज बोए फसल काटने की उम्मीद करना।


लेसन ३ : कंट्रोल अपने हाथ में रखिए वरना कस्टमर आपको घुमाता रहेगा

सेल्स की दुनिया में एक बहुत पुरानी बीमारी है जिसे कहते हैं 'फॉलो-अप का जाल'। आपने कस्टमर को सब कुछ समझा दिया। उसे प्रेजेंटेशन भी पसंद आ गई। फिर वह कहता है कि 'ठीक है भाई, मैं सोचकर बताता हूं'। और यहीं पर आप हार जाते हैं। आप उसे 'सोचने' के लिए छोड़ देते हैं और फिर हफ़्तों तक उसे पागलों की तरह फोन करते हैं। 'सर क्या हुआ। सर कुछ सोचा आपने।' यह सुनकर कस्टमर को लगता है कि आप बहुत ज्यादा खाली हैं और आपकी कोई वैल्यू नहीं है। एन्थनी इयानेरिनो कहते हैं कि सेल्स क्लोज करने का असली आर्ट यह है कि आप कभी भी मीटिंग को बिना 'अगले कदम' के खत्म न होने दें। अगर आप ड्राइवर की सीट छोड़ देंगे तो कस्टमर गाड़ी को किसी गड्ढे में ले जाकर खड़ा कर देगा।

सोचिए आप किसी जिम ट्रेनर के पास गए। उसने आपको सब समझा दिया और कहा कि कल सुबह ६ बजे आ जाना। आप जाएंगे क्योंकि उसने कंट्रोल लिया। लेकिन अगर वह कहता कि 'जब मन करे आ जाना' तो आप शायद कभी नहीं जाते। सेल्स में भी यही होता है। आपको कस्टमर को यह बताना होगा कि अगला लॉजिकल स्टेप क्या है। उसे कन्फ्यूज मत छोड़िए। कन्फ्यूज्ड दिमाग हमेशा 'ना' कहता है। अगर आप उसे रास्ता नहीं दिखाएंगे तो वह डर जाएगा और पीछे हट जाएगा। आपको उसे यह यकीन दिलाना होगा कि आप उसके साथ हैं। जब आप कंट्रोल अपने हाथ में रखते हैं तो आप किसी सेल्समेन की तरह नहीं बल्कि एक लीडर की तरह दिखते हैं। और लोग हमेशा लीडर्स से जुड़ना पसंद करते हैं।

ज्यादातर सेल्स के लोग डरते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने 'अगली मीटिंग' के लिए जोर दिया तो कस्टमर बुरा मान जाएगा। भाई साहब बुरा तब लगेगा जब आप उसका प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ देंगे। अगर आपका प्रोडक्ट सच में उसकी मदद कर सकता है तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप उसे क्लोजिंग तक ले जाएं। बिना कंट्रोल के सेल्स करना वैसा ही है जैसे बिना पतवार के नाव चलाना। आप बस लहरों के भरोसे रहते हैं और अंत में डूब जाते हैं। इसलिए अगली बार जब आप मीटिंग खत्म करें तो यह मत पूछिए कि 'मैं कब फोन करूं'। बल्कि यह कहिए कि 'हम मंगलवार को ३ बजे बैठ रहे हैं ताकि हम आगे का प्लान फाइनल कर सकें'। यही वह कॉन्फिडेंस है जो एक आम सेल्समेन और एक क्लोजर के बीच का फर्क तय करता है।


सेल्स कोई गला काटने वाली प्रतियोगिता नहीं है बल्कि यह एक दूसरे की मदद करने का जरिया है। अगर आप इन १० कमिटमेंट्स और ३ लेसन्स को अपनी लाइफ में उतार लेते हैं तो आपको कभी भी किसी के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दुनिया उन्हीं को सलाम करती है जो अपनी वैल्यू जानते हैं और दूसरों की लाइफ में बदलाव लाते हैं।

तो क्या आप तैयार हैं अपनी सेल्स गेम को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए। नीचे कमेंट में बताएं कि इन ३ लेसन्स में से कौन सा आपकी सबसे बड़ी कमजोरी रहा है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो दिन भर सेल्स कॉल्स में लगा रहता है। चलिए साथ मिलकर एक बेहतर सेल्स कम्युनिटी बनाते हैं।

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