The New Rules of Marketing & PR (Hindi)


अभी भी वही घिसे पिटे विज्ञापनों पर पैसा लुटा रहे हैं? मुबारक हो, आप अपनी बर्बादी का जश्न मना रहे हैं। जब पूरी दुनिया डिजिटल हो चुकी है, तब भी आप पुराने जमाने की मार्केटिंग से चिपके हैं। अपनी जेब खाली करना बंद कीजिए वरना लोग आपको और आपके ब्रांड को भूल जाएंगे।

आज हम डेविड मीरमैन स्कॉट की किताब से सीखेंगे कि कैसे डिजिटल दुनिया में बिना शोर मचाए राज करना है। ये तीन लेसन आपकी मार्केटिंग की सोच को पूरी तरह बदल देंगे और आपको सीधे कस्टमर के दिल तक पहुंचाएंगे।


लेसन १ : पुराने मार्केटिंग के नियमों का अंत और कंटेंट की शक्ति

मार्केटिंग की पुरानी दुनिया में आपका स्वागत है। जहां टीवी पर चिल्लाते हुए विज्ञापन और अखबार के पन्नों में दबी हुई खबरें ही राजा होती थीं। अगर आपके पास करोड़ों रुपये नहीं थे तो समझिए आपकी दुकान का शटर कभी नहीं उठेगा। लेकिन रुकिए। क्या आपको वाकई लगता है कि आज के जमाने में लोग उन फालतू विज्ञापनों को देखना चाहते हैं? बिलकुल नहीं। असलियत तो यह है कि जब भी टीवी पर एड आता है, लोग या तो फोन चलाने लगते हैं या फिर चैनल बदल देते हैं। और आप वहां अपना पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। कितना फनी है न? आप लोगों को परेशान करने के लिए पैसे दे रहे हैं।

डेविड मीरमैन स्कॉट कहते हैं कि मार्केटिंग के पुराने नियम अब कचरे के डिब्बे में डालने लायक हैं। पुराने दौर में मार्केटिंग का मतलब था इंटरप्शन। यानी लोग अपनी पसंद का काम कर रहे हैं और आप बीच में कूद पड़े। जैसे कोई फिल्म देख रहा हो और बीच में वाशिंग पाउडर का विज्ञापन आ जाए। यह वैसा ही है जैसे किसी की रोमांटिक डेट के बीच में जाकर आप उसे इंश्योरेंस बेचने की कोशिश करें। नतीजा? थप्पड़ तो नहीं पड़ेगा लेकिन वह इंसान आपसे नफरत जरूर करने लगेगा।

आज के दौर में लोग विज्ञापन नहीं बल्कि जानकारी चाहते हैं। वे समाधान ढूंढ रहे हैं। अगर आप उनकी समस्या हल नहीं कर सकते तो आपकी मार्केटिंग किसी काम की नहीं है। मान लीजिए आपकी एक साइकिल की दुकान है। पुराने तरीके से आप शहर भर में पोस्टर लगवाएंगे कि मेरी दुकान से साइकिल ले लो। लेकिन नए तरीके में आप एक ब्लॉग लिखेंगे या वीडियो बनाएंगे कि शहर के ट्रैफिक से बचने के लिए बेस्ट साइकिल कौन सी है। अब सोचिए कस्टमर किसके पास जाएगा? उसके पास जो सिर्फ चिल्ला रहा है या उसके पास जिसने उसकी मदद की?

इंटरनेट ने सबको बराबर कर दिया है। अब आपको किसी बड़े अखबार के एडिटर के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं है कि भाई साहब मेरी खबर छाप दो। अब आप खुद के पब्लिशर हैं। अगर आपके पास बताने के लिए कुछ अच्छा है तो दुनिया आपको सुनेगी। लेकिन याद रखिए यह तभी होगा जब आप लोगों को कुछ वैल्यू देंगे। सिर्फ अपनी तारीफ करने से काम नहीं चलेगा। लोग आपकी कंपनी के बारे में नहीं सुनना चाहते। वे यह सुनना चाहते हैं कि आप उनके लिए क्या कर सकते हैं।

जरा सोचिए आप सोशल मीडिया पर क्या देखते हैं? क्या आप वहां विज्ञापन देखने जाते हैं? नहीं न। आप वहां मनोरंजन या जानकारी के लिए जाते हैं। तो अगर आपका बिजनेस वहां सिर्फ अपनी सेल की बातें करेगा तो लोग आपको ब्लॉक करने में एक सेकंड भी नहीं लगाएंगे। आपको अपनी मार्केटिंग को कंटेंट में बदलना होगा। ऐसा कंटेंट जिसे लोग खुद ढूंढते हुए आएं। जब आप लोगों की मदद करना शुरू करते हैं तो वे आप पर भरोसा करने लगते हैं। और बिजनेस भरोसे पर ही चलता है।

पुराने नियम कहते थे कि सिर्फ पैसा बोलता है। नए नियम कहते हैं कि सिर्फ कंटेंट बोलता है। अब यह आपके ऊपर है कि आप शोर मचाकर लोगों को डराना चाहते हैं या उनकी लाइफ में कुछ अच्छी चीजें जोड़कर उन्हें अपना दोस्त बनाना चाहते हैं। याद रखिए दोस्त सामान खरीदते हैं और अनजान लोग विज्ञापन स्किप करते हैं।


लेसन २ : पीआर का नया अवतार और डायरेक्ट कस्टमर कनेक्शन

तो आपने अपनी मार्केटिंग को सुधारने का मन बना लिया है। बहुत अच्छी बात है। लेकिन अब बात करते हैं पीआर यानी पब्लिक रिलेशंस की। पुराने जमाने में पीआर का मतलब होता था कि आप एक प्रेस रिलीज लिखें और फिर किसी पत्रकार के हाथ पैर जोड़ें कि वह उसे छाप दे। यह वैसा ही है जैसे आप किसी पार्टी में बिन बुलाए मेहमान बनकर जाएं और उम्मीद करें कि सब आपको ही देखेंगे। सच तो यह है कि पत्रकारों के पास रोज हजारों ऐसी ईमेल आती हैं जिन्हें वे बिना पढ़े ही डिलीट कर देते हैं। और आप वहां अपनी किस्मत का रोना रोते रहते हैं। कितना दुखद है न? कि आपकी कंपनी की किस्मत किसी और के मूड पर टिकी है।

किताब हमें सिखाती है कि अब पीआर का खेल बदल चुका है। अब आपको किसी मीडिया हाउस के गेट पर दरबारी बनने की जरूरत नहीं है। इंटरनेट ने आपको अपनी बात सीधे जनता तक पहुंचाने का पावर दिया है। अब प्रेस रिलीज सिर्फ पत्रकारों के लिए नहीं होती। वह आपके ग्राहकों के लिए भी होती है। जब कोई गूगल पर अपनी समस्या सर्च करता है तो उसे आपकी प्रेस रिलीज दिखनी चाहिए। अगर वह उसे पढ़कर आपकी वेबसाइट पर आता है तो समझ लीजिए आपने बाजी मार ली। अब आप खुद ही खबर हैं और खुद ही खबर पहुंचाने वाले भी।

मान लीजिए आपने एक नया सॉफ्टवेयर बनाया है जो लोगों का समय बचाता है। पुराने तरीके में आप बड़ी बड़ी मैग्जीन को पैसे देते कि वे आपके बारे में लिखें। नए तरीके में आप एक जबरदस्त आर्टिकल लिखते हैं कि कैसे आज के भागदौड़ वाले जीवन में १० मिनट बचाए जा सकते हैं। जब लोग इसे पढ़ेंगे और उन्हें पता चलेगा कि आपका सॉफ्टवेयर यह काम करता है तो वे खुद आपकी तरफ खिंचे चले आएंगे। यहां आपने किसी का इंतजार नहीं किया। आपने खुद अपना रास्ता बनाया।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म सिर्फ फोटो डालने के लिए नहीं हैं। ये आपके पीआर टूल्स हैं। यहां आप अपनी कंपनी की कहानी सुना सकते हैं। लेकिन कहानी ऐसी होनी चाहिए जो लोगों को अपनी लगे। अगर आप सिर्फ अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटेंगे तो लोग आपको वैसे ही इग्नोर करेंगे जैसे वे उधार मांगने वाले रिश्तेदारों को करते हैं। आपको एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां लोग आपके ब्रांड के बारे में बात करें। जब लोग आपके बारे में अच्छी बातें करते हैं तो वह दुनिया के सबसे महंगे विज्ञापन से भी ज्यादा असरदार होता है।

जरा सोचिए अगर कल को सारे अखबार बंद हो जाएं तो क्या आपकी कंपनी भी बंद हो जाएगी? अगर जवाब हां है तो आप बहुत बड़े खतरे में हैं। आपको अपनी खुद की ऑडियंस बनानी होगी। ऐसी ऑडियंस जो आपके कंटेंट का इंतजार करे। जब आप सीधे अपने ग्राहकों से बात करते हैं तो बीच का बिचौलिया खत्म हो जाता है। इससे न सिर्फ आपके पैसे बचते हैं बल्कि आपकी बात में सच्चाई भी झलकती है। लोग अब बनावटी बातों से ऊब चुके हैं। उन्हें असलियत पसंद है।

तो पीआर को अब एक बोझ की तरह नहीं बल्कि एक मौके की तरह देखें। यह मौका है अपनी आवाज को दुनिया तक पहुंचाने का। बिना किसी की इजाजत लिए। बिना किसी के तलवे चाटे। बस एक अच्छा कंटेंट और सही प्लेटफॉर्म। आपकी सफलता अब किसी और के हाथ में नहीं बल्कि आपकी उंगलियों पर है। क्या आप इस आजादी के लिए तैयार हैं? या अभी भी उसी पुराने प्रेस रिलीज के पीछे भागना चाहते हैं जिसका अंत डस्टबिन में होता है?


लेसन ३ : रियल टाइम मार्केटिंग और न्यूजजैकिंग की रफ़्तार

अब बात करते हैं उस चीज की जिसके बिना आपकी सारी मेहनत बेकार है। वह है सही समय पर सही जगह होना। इसे रियल टाइम मार्केटिंग कहते हैं। पुराने जमाने में मार्केटिंग की प्लानिंग महीनों पहले होती थी। जैसे दिवाली की सेल के लिए अगस्त से ही माथापच्ची शुरू हो जाती थी। लेकिन आज की दुनिया बिजली की रफ्तार से चलती है। अगर आप आज की खबर पर कल रिएक्ट कर रहे हैं तो समझ लीजिए आप इतिहास बन चुके हैं। यह वैसा ही है जैसे बारात निकलने के बाद आप बैंड बाजा लेकर पहुंच जाएं। लोग आप पर हंसेंगे ही न?

डेविड मीरमैन स्कॉट कहते हैं कि आज के दौर में वही जीतता है जो मौके पर चौका मारना जानता है। इंटरनेट पर हर मिनट कुछ नया वायरल होता है। कोई नया मीम आता है या कोई बड़ी खबर आती है। अगर आपका ब्रांड उस बहती गंगा में हाथ धोना जानता है तो आप बिना एक रुपया खर्च किए करोड़ों लोगों तक पहुंच सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको अपनी कुंभकरण वाली नींद से जागना होगा। आप अपनी पुरानी फाइलों में दबकर यह नहीं कह सकते कि हम अगले महीने इस पर मीटिंग करेंगे। तब तक तो दुनिया उस बात को भूलकर आगे बढ़ चुकी होगी।

मान लीजिए सोशल मीडिया पर अचानक से किसी खास तरह के जूते का ट्रेंड चल गया। अब अगर आपकी कंपनी जूते बनाती है और आप तीन हफ्ते बाद उस पर पोस्ट डालते हैं तो लोग कहेंगे कि भाई साहब आप थोड़े लेट हो गए। लेकिन अगर आप उसी घंटे एक मजेदार और व्यंग्य से भरा पोस्ट डाल देते हैं तो आप रातों रात इंटरनेट सेंसर बन सकते हैं। इसे ही कहते हैं न्यूजजैकिंग। यानी चल रही खबर का फायदा उठाकर अपनी मार्केटिंग करना। यह सुनने में जितना आसान है करने में उतना ही रिस्की है। अगर आपने गलत बात कह दी तो लेने के देने पड़ सकते हैं। इसलिए दिमाग का इस्तेमाल करना जरूरी है।

जरा सोचिए आप पोडकास्ट या ब्लॉग क्यों सुनते या पढ़ते हैं? क्योंकि वहां आपको ताजा जानकारी मिलती है। लोग अब उन भारी भरकम किताबों या पुराने विज्ञापनों पर भरोसा नहीं करते। वे जानना चाहते हैं कि अभी क्या हो रहा है। अगर आप एक एक्सपर्ट की तरह अपनी राय तुरंत लोगों के सामने रखते हैं तो आपकी वैल्यू बढ़ जाती है। लोग आपको एक लीडर की तरह देखने लगते हैं। और याद रखिए लोग लीडर्स से सामान खरीदना पसंद करते हैं किसी फॉलोअर से नहीं।

आजकल की मार्केटिंग का सबसे बड़ा सच यह है कि यहां कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है। एक अकेला इंसान अपने कमरे में बैठकर एक ऐसा वीडियो या ब्लॉग बना सकता है जो किसी मल्टीनेशनल कंपनी की करोड़ों की मार्केटिंग टीम को धूल चटा दे। क्यों? क्योंकि वह इंसान रियल है। वह असलियत दिखा रहा है। वह अपनी ऑडियंस से सीधे जुड़ा हुआ है। अगर आप भी अपनी मार्केटिंग में वह इंसानियत और तेजी ला सकें तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। अब बहाने बनाना बंद कीजिए कि आपके पास बजट कम है। इंटरनेट पर बजट नहीं बल्कि बुद्धि चलती है।

तो क्या आप अभी भी अपनी पुरानी मार्केटिंग की फाइलों को सीने से लगाए बैठे रहेंगे? या फिर इस नए दौर की रफ़्तार के साथ कदम मिलाएंगे? फैसला आपका है। या तो आप ट्रेंड सेट करने वाले बनिए या फिर सिर्फ दूसरों की सफलता देखकर तालियां बजाते रहिए। मार्केटिंग अब एक जंग है और इस जंग में वही टिकेगा जो सबसे तेज और सबसे ज्यादा मददगार होगा। चलिए अब अपनी पुरानी सोच को विदा कीजिए और डिजिटल दुनिया के नए राजा बनिए।


मार्केटिंग अब किसी को बेवकूफ बनाने का नाम नहीं है। यह लोगों की जिंदगी को आसान बनाने और उनके साथ एक सच्चा रिश्ता जोड़ने का नाम है। डेविड मीरमैन स्कॉट की यह किताब हमें सिखाती है कि कैसे हम बिना किसी बड़े बजट के भी अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं। अगर आप अभी भी पुराने नियमों के भरोसे बैठे हैं तो आप खुद को पीछे धकेल रहे हैं। उठिए और आज से ही अपने कंटेंट के जरिए लोगों के दिलों में जगह बनाना शुरू कीजिए।

अगर आपको यह लेसन काम के लगे तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अब भी पुराने विज्ञापनों पर पैसा बर्बाद कर रहे हैं। कमेंट में बताएं कि आपका पसंदीदा मार्केटिंग का तरीका कौन सा है? चलिए मिलकर इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनते हैं।

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