The One Week Marketing Plan (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिन भर गधों की तरह मार्केटिंग करते हैं और फिर भी बैंक बैलेंस जीरो रहता है? बधाई हो। आप अपनी मेहनत और पैसा दोनों नाले में बहा रहे हैं। जबकि आपके कॉम्पिटिटर्स सो रहे हैं और पैसा छाप रहे हैं। क्योंकि उनके पास दिमाग है और आपके पास सिर्फ पसीना।

अगर आप अभी भी वही पुराने घिसे-पिटे तरीके अपना रहे हैं तो आप बहुत कुछ खो रहे हैं। चलिए जानते हैं मार्क सेटरफील्ड के वो ३ लेसन्स जो आपके बिजनेस को सात दिनों में रॉकेट बना देंगे और आपकी जिंदगी बदल देंगे।


लेसन १ : सबको खुश करना बंद करो और अपना असली शिकार चुनो

अगर आप सोचते हैं कि आपका प्रोडक्ट दुनिया के हर इंसान के लिए है तो यकीन मानिए आप किसी के लिए भी नहीं हैं। ये सबसे बड़ी गलती है जो इंडिया के ज्यादातर छोटे बिजनेसमैन करते हैं। वो सोचते हैं कि जितना बड़ा जाल फेकेंगे उतनी ज्यादा मछली फंसेगी। पर असलियत में आप सिर्फ समंदर का पानी छान रहे होते हैं और हाथ में आती है सिर्फ गीली रेत। मार्क सेटरफील्ड कहते हैं कि अपनी नीश चुनना ही सक्सेस की पहली सीढ़ी है।

मान लीजिए आप एक डॉक्टर हैं। अब अगर आप बोर्ड पर लिख दें कि मैं सिर दर्द से लेकर पैर के नाखून तक सबका इलाज करता हूँ तो लोग आपको झोलाछाप समझेंगे। लेकिन अगर आप लिखें कि मैं सिर्फ स्पोर्ट्स इंजरी का एक्सपर्ट हूँ तो क्रिकेट खेलने वाला हर लड़का आपके पास ही आएगा। क्योंकि आपने भीड़ में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। जब आप सबको अपना कस्टमर बनाने की कोशिश करते हैं तो आप अपनी वैल्यू खुद ही गिरा देते हैं। मार्केटिंग में इसे कहते हैं कन्फ्यूज्ड होना और कन्फ्यूज्ड कस्टमर कभी अपना वॉलेट नहीं खोलता।

आपकी मार्केटिंग की एनर्जी उन ९० परसेंट लोगों पर बर्बाद हो रही है जिन्हें आपके प्रोडक्ट की जरूरत ही नहीं है। जैसे किसी गंजे को कंघी बेचना मेहनत तो बहुत है पर रिजल्ट जीरो है। आपको वो १० परसेंट लोग ढूंढने हैं जिनकी रातों की नींद आपके प्रोडक्ट से उड़ सकती है। जब आप अपनी नीश चुन लेते हैं तो आपकी मार्केटिंग की कॉस्ट कम हो जाती है और प्रॉफिट मार्जिन आसमान छूने लगता है। लोग आपको एक्सपर्ट की तरह देखते हैं और एक्सपर्ट हमेशा अपनी मर्जी की फीस मांगता है।

मान लीजिए आप एक जिम चलाते हैं। अगर आप कहेंगे कि यहाँ सब आओ तो कोई खास बात नहीं है। लेकिन अगर आप कहें कि ये जिम सिर्फ उन नई माताओं के लिए है जो प्रेगनेंसी के बाद वजन कम करना चाहती हैं तो आप मार्केट के किंग बन जाएंगे। अब आपको करोड़ों लोगों को एड दिखाने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ उन औरतों तक पहुँचना है जिन्हें आपकी सच में जरूरत है। यही है द वन वीक मार्केटिंग प्लान का असली जादू। अपनी बाउंड्री सेट करिए ताकि सही लोग आपके अंदर आ सकें और गलत लोग अपने आप बाहर हो जाएं।

याद रखिए कि एक लेजर लाइट की ताकत इसलिए होती है क्योंकि उसकी सारी एनर्जी एक ही पॉइंट पर होती है। अपनी मार्केटिंग की एनर्जी को बिखेरना बंद करिए। जब आप अपने आइडियल कस्टमर को जान लेते हैं तो आप उनकी भाषा में बात कर पाते हैं। आपको पता होता है कि उन्हें क्या डर सताता है और उन्हें किस चीज से खुशी मिलती है। जब आपकी एड कॉपी या आपका ब्लॉग उनके दिल को छूता है तो वो पैसे देने में एक सेकंड भी नहीं सोचते।

मार्केटिंग का मतलब शोर मचाना नहीं है बल्कि सही कान में सही बात कहना है। अगर आप आज भी सबको पटाने की कोशिश कर रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं बल्कि चैरिटी कर रहे हैं और चैरिटी से घर नहीं चलता। अब जब आपने अपना शिकार चुन लिया है तो अगले स्टेप में हम सीखेंगे कि उन्हें अपने जाल में कैसे फंसाना है यानी कि आपका हब और स्पोक मॉडल।


लेसन २ : हब एंड स्पोक मॉडल - अपने बिजनेस का चकराव्यूह तैयार करें

एक बार जब आप यह तय कर लेते हैं कि आपका असली कस्टमर कौन है तो अगला सवाल यह आता है कि उन्हें अपने पास लाएं कैसे। क्या आप अभी भी गली के नुक्कड़ पर खड़े होकर पर्चे बांट रहे हैं? या फिर फेसबुक पर रैंडम पोस्ट डालकर भगवान से दुआ मांग रहे हैं कि काश कोई क्लिक कर दे? अगर हां तो आपकी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी वैसी ही है जैसे बिना पते के चिट्ठी पोस्ट करना। मार्क सेटरफील्ड हमें सिखाते हैं हब एंड स्पोक मॉडल। यह सुनने में भारी भरकम लग सकता है पर है बहुत ही सिंपल और पावरफुल।

कल्पना कीजिए कि आपका बिजनेस एक साइकिल का पहिया है। पहिये के बीच का जो हिस्सा होता है जिसे हब कहते हैं वह आपकी वेबसाइट या आपका मेन लैंडिंग पेज है। और जो तीलियां यानी स्पोक बाहर की तरफ निकलती हैं वह आपके अलग अलग मार्केटिंग चैनल्स हैं जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ईमेल्स या ब्लॉग्स। ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वो सिर्फ तीलियां बनाने में लगे रहते हैं पर बीच का हब गायब होता है। आप सोशल मीडिया पर बहुत फेमस हैं पर आपके पास कस्टमर का डेटा ही नहीं है तो आप सिर्फ दूसरों के प्लेटफॉर्म पर नाच रहे हैं।

इसे एक इंडियन शादी के एक्जाम्पल से समझते हैं। शादी में जो दूल्हा या दुल्हन होते हैं वो हब हैं। और जो फूफाजी, जीजाजी या मौसी शिकायतें लेकर घूम रहे हैं वो स्पोक हैं। अब फूफाजी चाहे जितना भी रायता फैला लें सबका आखिरी मकसद दूल्हा दुल्हन के पास जाकर फोटो खिंचवाना ही होता है। आपकी मार्केटिंग भी ऐसी ही होनी चाहिए। आप चाहे लिंकडइन पर ज्ञान बाटें या ट्विटर पर मीम्स बनाएं हर रास्ते का आखिरी मोड़ आपकी वेबसाइट पर ही खत्म होना चाहिए। अगर आपका कस्टमर आपके सोशल मीडिया पेज से एंटरटेन होकर निकल गया और उसने आपकी वेबसाइट पर कदम नहीं रखा तो आपने सिर्फ उसका मनोरंजन किया है बिजनेस नहीं।

लोग अक्सर कहते हैं कि कंटेंट किंग है पर सच तो यह है कि कन्वर्जन किंग है। आपके पास लाखों व्यूज हों पर बैंक में जीरो रुपया हो तो ऐसे फेम का अचार डालेंगे क्या? हब एंड स्पोक मॉडल का असली काम यह है कि यह आपके कस्टमर को एक चकराव्यूह में फंसा देता है। वह जहां भी जाए उसे आपकी ही याद आनी चाहिए। उसने फेसबुक खोला तो आपकी पोस्ट दिखी। उसने गूगल किया तो आपका ब्लॉग दिखा। उसने मेल चेक किया तो आपकी वैल्युएबल टिप मिली। उसे लगना चाहिए कि पूरी कायनात उसे आपसे ही सामान खरीदने के लिए कह रही है।

इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि आपका हब यानी आपकी वेबसाइट कचरा नहीं होनी चाहिए। अगर कोई कस्टमर बड़ी उम्मीद से आपकी लिंक पर क्लिक करता है और वहां उसे १९९० के जमाने की वेबसाइट दिखती है तो वह तुरंत भाग जाएगा। आपका हब ऐसा होना चाहिए जहां उसे अपनी हर मुश्किल का हल मिले। वहां उसे ऐसा महसूस होना चाहिए कि यह इंसान मुझे समझता है। जब आप अपने हब पर सही इनफार्मेशन और वैल्यू देते हैं तो कस्टमर का भरोसा आप पर बढ़ जाता है।

एक बार जब यह पहिया घूमने लगता है तो यह अपने आप स्पीड पकड़ लेता है। आपको हर बार नई मेहनत नहीं करनी पड़ती। आपकी पुरानी पोस्ट्स और वीडियो भी कस्टमर्स को खींचकर आपके हब तक लाती रहती हैं। यह एक ऐसा जाल है जिसे आपने एक बार अच्छे से बुन लिया तो फिर कस्टमर कहीं जा ही नहीं पाएगा। लेकिन क्या आप ये सब कुछ रोज खुद करेंगे? बिल्कुल नहीं। इसके लिए हमें जरूरत है अगले लेसन की जो है ऑटोमेशन।


लेसन ३ : ऑटोमेशन का जादू - सोए रहो और पैसा कमाओ

अब आता है वो लेसन जो एक थके हुए दुकानदार और एक स्मार्ट बिजनेसमैन के बीच का असली फर्क है। क्या आप अभी भी हर कस्टमर को खुद फोन करते हैं? या हर इंक्वायरी का जवाब देने के लिए खुद टाइप करते बैठते हैं? अगर हां तो आप बिजनेस नहीं कर रहे हैं आप अपने ही बिजनेस के गुलाम बन चुके हैं। मार्क सेटरफील्ड कहते हैं कि एक असली मार्केटिंग प्लान वो है जिसे आप एक बार सेट करें और फिर उसे भूल जाएं यानी सेट इट एंड फॉरगेट इट।

इसे एक कहावत से समझते हैं कि आम के आम और गुठलियों के दाम। पुराने जमाने में किसान कुएं से पानी निकालने के लिए खुद मेहनत करता था पर आज के स्मार्ट किसान ने मोटर लगा दी है। बटन दबाओ और पानी अपने आप खेत में। आपकी मार्केटिंग भी ऐसी ही होनी चाहिए। जैसे ही कोई कस्टमर आपकी वेबसाइट पर अपना नाम और ईमेल डाले उसे तुरंत एक वेलकम मेल जाना चाहिए। उसके दो दिन बाद उसे एक काम की टिप मिलनी चाहिए और उसके अगले दिन उसे आपका डिस्काउंट ऑफर दिखना चाहिए। यह सब कुछ अपने आप होना चाहिए जबकि आप शायद उस वक्त लोनावला में वड़ा पाव खा रहे हों।

मार्केटिंग ऑटोमेशन को लोग बहुत मुश्किल समझते हैं पर यह उतना ही आसान है जितना वॉट्सऐप पर गुड मॉर्निंग मैसेज फॉरवर्ड करना। बस फर्क यह है कि यहाँ आप पैसा कमाने के लिए मैसेज भेज रहे हैं। असलियत यह है कि एक कस्टमर पहली बार में कभी नहीं खरीदता। उसे कम से कम पांच से सात बार आपका चेहरा देखना पड़ता है तब जाकर उसे आप पर भरोसा होता है। अब अगर आप सात बार हर कस्टमर के पीछे भागेंगे तो आप पागल हो जाएंगे। लेकिन एक ऑटोमेटेड ईमेल सीक्वेंस यह काम आपके लिए बिना थके और बिना सैलरी मांगे चौबीसों घंटे करता रहता है।

सोचिए आपके पास एक ऐसा सेल्समैन है जो कभी छुट्टी नहीं लेता कभी बीमार नहीं पड़ता और कभी बॉस से बहस नहीं करता। यही है ऑटोमेशन की ताकत। जब आप सिस्टम बना लेते हैं तो आपका बिजनेस एक मशीन बन जाता है। बहुत से लोग डरते हैं कि मशीन से बात करके कस्टमर को बुरा लगेगा। पर भाई साहब अगर आप उसे काम की बात बता रहे हैं और उसकी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं तो उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेल आपने टाइप किया है या रोबोट ने। बल्कि उसे यह अच्छा लगेगा कि आप उसे भूलते नहीं हैं।

मार्केटिंग का असली मजा तभी है जब वो आपके लिए फ्री टाइम क्रिएट करे। अगर मार्केटिंग करने के बाद भी आपके पास अपने परिवार के साथ बैठने का वक्त नहीं है तो ऐसी मार्केटिंग का क्या फायदा? द वन वीक मार्केटिंग प्लान का मतलब ही यही है कि एक हफ्ता डटकर मेहनत करो सारा सिस्टम सेट करो सारे स्पोक्स को हब से जोड़ो और ऑटोमेशन की चाबी घुमा दो। उसके बाद आपका काम सिर्फ यह देखना है कि पहिया सही से घूम रहा है या नहीं।

तो क्या आप तैयार हैं अपने बिजनेस को ऑटोपायलट पर डालने के लिए? याद रखिए कि दुनिया बहुत तेजी से भाग रही है। अगर आप खुद हाथ से चप्पू चलाते रहेंगे तो कभी समंदर पार नहीं कर पाएंगे। आपको एक इंजन लगाना ही होगा। अपनी नीश चुनिए अपना हब बनाइए और उसे ऑटोमेट करिए। यही वो रास्ता है जो आपको एक मामूली दुकानदार से एक कामयाब एंटरप्रेन्योर बनाएगा। आज ही कदम उठाइए और अपने सात दिनों के प्लान पर काम शुरू करिए क्योंकि आपका फ्यूचर आपका इंतजार कर रहा है।

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