क्या आपकी लाइफ इतनी बोरिंग हो गई है कि आपको पिछला हफ्ता भी याद नहीं है। बधाई हो आप एक रोबोट की तरह बस जी रहे हैं। अगर आप अभी भी वही घिसी पिटी रूटीन फॉलो कर रहे हैं तो आप अपनी लाइफ के सबसे शानदार और यादगार लम्हे खो रहे हैं। सच तो यह है कि आपकी याददाश्त कचरा बन चुकी है क्योंकि आप मोमेंट्स बनाना जानते ही नहीं।
इस आर्टिकल में हम चिप हीथ और डैन हीथ की किताब द पावर ऑफ मोमेंट्स से वह सीक्रेट्स सीखेंगे जो आपकी साधारण सी जिंदगी को एक्स्ट्राऑर्डिनरी बना देंगे। चलिए देखते हैं वह ३ लेसन्स जो आपकी लाइफ और बिजनेस को हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : पीक एंड रूल का जादू
क्या आपको अपनी फेवरिट वेकेशन का हर एक मिनट याद है। बिल्कुल नहीं। हमारा दिमाग कोई वीडियो रिकॉर्डर नहीं है जो २४ घंटे की फुटेज सेव रखे। असल में हमारा दिमाग बहुत आलसी और चूजी है। चिप और डैन हीथ हमें बताते हैं कि लोग किसी भी अनुभव को दो ही चीजों से जज करते हैं। पहला कि उस अनुभव का सबसे बेस्ट यानी पीक पॉइंट क्या था और दूसरा कि उसका अंत कैसा था। इसे ही साइकोलॉजी में पीक एंड रूल कहते हैं। बाकी की बीच की सारी फालतू बातें हमारा दिमाग डस्टबिन में डाल देता है।
मान लीजिए आप एक बहुत ही महंगे रेस्टोरेंट में डिनर करने गए। वहां का वेटर्स का बर्ताव ठीक ठाक था और खाना भी एवरेज था। लेकिन जैसे ही आप बिल पे करने वाले थे तभी शेफ खुद आपकी टेबल पर आया और उसने आपको एक स्पेशल कॉम्प्लीमेंट्री डेजर्ट सर्व किया जो उसने सिर्फ आपके लिए बनाया था। अब आप घर आकर सबको क्या बताएंगे। आप यही कहेंगे कि भाई क्या जबरदस्त एक्सपीरियंस था। आप वह एवरेज खाना और बोरिंग वेटिंग टाइम भूल जाएंगे क्योंकि उस एक पीक मोमेंट और शानदार एंड ने आपकी पूरी याददाश्त ही बदल दी।
यही हाल हमारी लाइफ का भी है। हम लोग पागलों की तरह हर दिन को परफेक्ट बनाने की कोशिश करते हैं और अंत में कुछ भी याद नहीं रहता। स्मार्ट लोग जानते हैं कि हर पल को सुधारने की जरूरत नहीं है। बस कुछ ऐसे लम्हे क्रिएट कर दो जो पीक बन जाएं। जैसे कि ऑफिस में कोई प्रोजेक्ट खत्म होने पर बस थैंक यू बोल देना काफी नहीं है। अगर आप पूरी टीम को अचानक सरप्राइज लंच पर ले जाएं तो वह एक पीक मोमेंट बन जाएगा जो उन्हें सालों तक याद रहेगा।
लेकिन हम इंडियंस को तो बस गधे की तरह काम करने की आदत है। हम सोचते हैं कि अगर हम लगातार मेहनत करेंगे तो लोग हमें याद रखेंगे। अरे भाई अगर आप अपनी एनिवर्सरी पर अपनी वाइफ को सिर्फ एक महंगा गिफ्ट देकर भूल जाएंगे तो वह उसे याद नहीं रहेगा। लेकिन अगर आप उसे किसी ऐसी जगह ले जाएं जहां आप पहली बार मिले थे और वहां पुराने गानों पर डांस करें तो वह एक पीक मोमेंट बन जाएगा।
जरा सोचिए उन ब्रांड्स के बारे में जो आपको याद रहते हैं। वह आपको हर वक्त खुश नहीं रखते। वह बस आपकी प्रॉब्लम के समय एक ऐसा सर्विस मोमेंट दे देते हैं जो आपका दिन बना देता है। अगर आपका फोन खराब हो जाए और सर्विस सेंटर वाले उसे ठीक करने के साथ साथ आपको एक फ्री स्क्रीन गार्ड और स्माइल के साथ चाय ऑफर कर दें तो आप उनके फैन बन जाएंगे। वह चाय का कप उस पूरे खराब एक्सपीरियंस को एक पॉजिटिव एंड में बदल देता है।
इसलिए अपनी लाइफ को एक फिल्म की तरह देखना शुरू कीजिए। फिल्म में हर सीन ऑस्कर लेवल का नहीं होता। उसमें कुछ बोरिंग डायलॉग्स भी होते हैं। लेकिन फिल्म हिट तभी होती है जब उसमें कम से कम तीन चार ऐसे सीन हों जहां दर्शक सीट से उछल पड़ें। आपको भी अपनी रूटीन लाइफ में ऐसे ही इंटरवल और क्लाइमेक्स डालने होंगे। वरना आपकी लाइफ की फिल्म तो फ्लॉप होनी ही है और कोई उसे दोबारा देखना भी नहीं चाहेगा।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे हम अपनी इसी बोरिंग लाइफ में रोमांच का तड़का लगा सकते हैं।
लेसन २ : एलिवेशन के साथ साधारण को खास बनाना
क्या आपने कभी सोचा है कि हम अपनी पूरी जिंदगी बस शनिवार और रविवार का इंतजार करने में ही क्यों निकाल देते हैं। बाकी के पांच दिन तो जैसे हमारी लाइफ के सेल पर लगे हुए पुराने कपड़े हैं जिन्हें हम बस मजबूरी में पहन रहे हैं। चिप और डैन हीथ कहते हैं कि अगर आप अपनी लाइफ को यादगार बनाना चाहते हैं तो आपको एलिवेशन यानी ऊंचाई का सहारा लेना होगा। इसका मतलब है किसी साधारण से अनुभव को अचानक इतना खास बना देना कि वह आपके दिमाग में छप जाए। इसके लिए आपको तीन चीजों की जरूरत होती है। सेंसरी प्लेजर यानी आपके पांचों सेंस को अच्छा महसूस कराना, ऊंचे दांव लगाना और स्क्रिप्ट को तोड़ देना।
अब हमारे यहाँ इंडिया में क्या होता है। बर्थडे का मतलब है वही घिसा पिटा केक लाना, मोमबत्ती बुझाना और फिर वही पनीर टिक्का खाकर सो जाना। यह तो स्क्रिप्टेड है। इसमें नया क्या है। एलिवेशन तब होता है जब आप इस स्क्रिप्ट को फाड़कर फेंक देते हैं। मान लीजिए आप अपने दोस्त के बर्थडे पर उसे किसी महंगे होटल में ले जाने के बजाय रात के दो बजे शहर की सबसे पुरानी और मशहूर चाय की टपरी पर ले जाते हैं और वहां ढोल वालों को बुला लेते हैं। वह अचानक मिला सरप्राइज और वह माहौल एक ऐसा सेंसरी प्लेजर क्रिएट करता है जिसे वह कभी नहीं भूलेगा। आपने स्क्रिप्ट तोड़ दी और उसे एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी मोमेंट दे दिया।
बिजनेस में भी यही फॉर्मूला काम करता है। अमेरिका में एक होटल है जिसका नाम है मैजिक कैसल। वह कोई बहुत लग्जरी होटल नहीं है। लेकिन वहां पूल के पास एक लाल रंग का फोन लगा है जिसे पॉपसिकल हॉटलाइन कहते हैं। जैसे ही आप फोन उठाते हैं एक वेटर चांदी की ट्रे में आपको फ्री में बर्फ वाली कैंडी सर्व करने आ जाता है। सोचिए जरा एक पांच रुपये की कैंडी के लिए लोग वहां हजारों रुपये खर्च करते हैं। क्यों। क्योंकि वहां उन्होंने एक साधारण सी सर्विस को एलिवेट कर दिया है। हमारे यहाँ के दुकानदार तो स्माइल तक फ्री में नहीं देते। वह सोचते हैं कि ज्यादा प्यार से बात करेंगे तो ग्राहक डिस्काउंट मांग लेगा।
आपको अपनी लाइफ में भी ऐसे मोमेंट्स प्लान करने होंगे जहां आप साधारण रूटीन को ब्रेक करें। अगर आप हर साल अपनी टीम के साथ वही बोरिंग मीटिंग करते हैं तो इस बार मीटिंग किसी पार्क में या किसी ट्रेकिंग ट्रिप पर कीजिए। जब आप ऊंचे दांव लगाते हैं यानी कुछ ऐसा करते हैं जिसमें थोड़ा रिस्क हो या जो बिल्कुल अलग हो तो वहां इमोशंस पैदा होते हैं। और जहां इमोशंस होते हैं वहां यादें अपने आप बन जाती हैं।
हम अक्सर सोचते हैं कि बड़े मोमेंट्स बनाने के लिए बहुत पैसा चाहिए। यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। एलिवेशन के लिए पैसे से ज्यादा क्रिएटिविटी और एफर्ट की जरूरत होती है। एक पिता अपने बेटे को महंगे खिलौने दिलाकर उतना खुश नहीं कर सकता जितना वह उसे एक रात छत पर टेंट लगाकर तारों को दिखाते हुए पुरानी कहानियां सुनाकर कर सकता है। वह रात उस बच्चे के लिए एक यादगार लेसन बन जाएगी क्योंकि वहां आपने उसके सेंस और उसके दिल दोनों को छुआ है।
याद रखिए अगर आपकी लाइफ में कोई पीक नहीं है तो इसका मतलब है कि आपकी लाइफ का ग्राफ बिल्कुल सीधा है। और मेडिकल भाषा में सीधा ग्राफ मतलब आप डेड हैं। तो क्या आप जिंदा लाश बनकर जीना चाहते हैं या अपनी लाइफ में एलिवेशन का तड़का लगाना चाहते हैं। चॉइस आपकी है। लेकिन अगर आप अभी भी नहीं जागे तो यकीन मानिए आपकी लाइफ की कहानी से ज्यादा इंटरेस्टिंग तो किसी न्यूज चैनल की हेडलाइन्स होंगी।
अगले लेसन में हम जानेंगे कि कैसे आप दूसरों के साथ जुड़कर अपनी और उनकी वैल्यू बढ़ा सकते हैं।
लेसन ३ : कनेक्शन और प्राइड की शक्ति
इंसान एक सामाजिक जानवर है पर आजकल हम सिर्फ सोशल मीडिया के जानवर बनकर रह गए हैं। हम हजारों लोगों की फोटो लाइक करते हैं पर असल में हमारा कनेक्शन किसी से नहीं है। चिप और डैन हीथ कहते हैं कि सबसे यादगार लम्हे वह होते हैं जो हमें दूसरों से जोड़ते हैं और हमें खुद पर प्राइड यानी गर्व महसूस कराते हैं। हमारे देश में तो टैलेंट की कमी नहीं है पर तारीफ करने के मामले में हम बड़े कंजूस हैं। हम सोचते हैं कि अगर किसी की तारीफ कर दी तो उसके भाव बढ़ जाएंगे। जबकि सच तो यह है कि एक छोटी सी तारीफ किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।
सोचिए आपके स्कूल का वह टीचर आपको आज भी क्यों याद है। इसलिए नहीं कि उसने बहुत अच्छा पढ़ाया था बल्कि इसलिए क्योंकि जब आपने एक बार मुश्किल सवाल का जवाब दिया था तो उसने पूरी क्लास के सामने आपकी पीठ थपथपाई थी। वह मोमेंट आपके लिए प्राइड का मोमेंट था। उसने आपको यह महसूस कराया कि आप कुछ खास हैं। यही जादू है छोटे-छोटे माइलस्टोन्स को सेलिब्रेट करने का। लेकिन हमारे यहाँ तो लोग तब तक पार्टी नहीं देते जब तक कि लड़का सरकारी नौकरी न पा ले या घर न खरीद ले। अरे भाई छोटी जीत को सेलिब्रेट करना सीखिए।
कनेक्शन बनाने का सबसे आसान तरीका है साथ में मुश्किलों का सामना करना। आपने देखा होगा कि जब किसी ऑफिस में बहुत बड़ा संकट आता है और पूरी टीम रात-रात भर जागकर उसे सुलझाती है तो वह टीम हमेशा के लिए एक परिवार बन जाती है। वह थकान और वह टेंशन उन्हें आपस में ऐसा जोड़ देती है जो कोई पार्टी नहीं जोड़ सकती। इसे ही हीथ ब्रदर्स शेयर्ड स्ट्रगल कहते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपके रिश्ते गहरे हों तो सिर्फ सुख के साथी मत बनिए। साथ में कुछ बड़ा और मुश्किल काम कीजिए।
प्राइड का एक और सीक्रेट है रिकग्निशन यानी पहचान। लेकिन ध्यान रहे यह पहचान असली होनी चाहिए। आजकल की कंपनियों में जो एम्प्लॉई ऑफ द मंथ का बोर्ड लगता है वह अक्सर इतना बोरिंग होता है कि उसे खुद वह एम्प्लॉई भी नहीं देखना चाहता। असली प्राइड तब मिलता है जब आपका बॉस आपको सबके बीच बुलाकर यह बताए कि आपकी वजह से कंपनी को कितना फायदा हुआ और वह आपकी एक खास खूबी की तारीफ करे।
हम अक्सर अपने करीबियों को टेकन फॉर ग्रांटेड ले लेते हैं। अपनी मां या अपनी वाइफ को कभी अचानक यह बोलकर देखिए कि वह घर को कितनी अच्छी तरह संभालती हैं और उनके बिना आप अधूरे हैं। यह एक छोटा सा पल उनके लिए उस साल का सबसे बड़ा मोमेंट बन जाएगा। याद रखिए बड़े बदलाव हमेशा बड़े इवेंट्स से नहीं आते बल्कि उन छोटे-छोटे कनेक्शन से आते हैं जो हम हर दिन बना सकते हैं।
अगर आप अपनी लाइफ में सिर्फ पैसा और कामयाबी कमाएंगे तो अंत में आप बहुत अकेले होंगे। लेकिन अगर आप मोमेंट्स कमाएंगे तो आपके पास यादों का एक ऐसा खजाना होगा जो कभी खत्म नहीं होगा। तो आज से ही कंजूसी छोड़िए और लोगों को खास महसूस कराना शुरू कीजिए। क्योंकि अंत में सिर्फ वही याद रह जाएगा जिसने किसी का दिल छुआ होगा।
जिंदगी गुजर नहीं रही है साहब आप उसे गुजार रहे हैं। मोमेंट्स अपने आप नहीं बनते उन्हें बनाना पड़ता है। आज ही किसी एक इंसान के लिए कुछ ऐसा कीजिए जो अनपेक्षित हो। चाहे वह एक छोटी सी तारीफ हो या कोई छोटा सा सरप्राइज। अपनी लाइफ की फिल्म के डायरेक्टर खुद बनिए और हर दिन को एक नया सीन दीजिए। नीचे कमेंट में बताइए कि आपकी लाइफ का वह एक यादगार मोमेंट कौन सा है जिसने आपको हमेशा के लिए बदल दिया। चलिए इस दुनिया को थोड़ा और यादगार बनाते हैं।
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