Traffic Secrets (Hindi)



आप दिन रात गधों की तरह मेहनत कर रहे हैं पर आपकी वेबसाइट पर सन्नाटा ऐसा है जैसे शमशान घाट में पार्टी चल रही हो। अपनी जेब खाली करके एड्स चला रहे हैं और कस्टमर फिर भी गायब है। मुबारक हो आप अपनी जिंदगी और पैसा दोनों बर्बाद करने में एक्सपर्ट बन चुके हैं।

आज हम रसल ब्रन्सन की किताब ट्रैफिक सीक्रेट्स के उन राजों को खोलेंगे जो आपके खाली फनल को पैसों की मशीन बना देंगे। तैयार हो जाइए क्योंकि ये ३ लेसन्स आपकी सोई हुई किस्मत और बिजनेस दोनों को झटके से जगाने वाले हैं।


लेसन १ : अपने ड्रीम कस्टमर को पहचानना और ढूंढना

जरा सोचिए आप रेगिस्तान के बीचों बीच एक शानदार छतरी की दुकान खोलकर बैठ गए हैं। अब आप रो रहे हैं कि सेल नहीं हो रही। भाई मेरे वहां कस्टमर नहीं ऊंट मिलेंगे। यही हाल आप अपनी वेबसाइट के साथ कर रहे हैं। आप बस कंटेंट बनाए जा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि कोई गलती से वहां आ जाए। रसल ब्रन्सन कहते हैं कि ट्रैफिक कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप पैदा करते हैं। ट्रैफिक तो पहले से ही इंटरनेट पर घूम रहा है। बस आपको यह पता लगाना है कि आपका वह ड्रीम कस्टमर आखिर छुपा कहां है।

क्या आपने कभी सोचा है कि आपका वह आदर्श ग्राहक सुबह उठकर सबसे पहले क्या देखता है। वह किन फेसबुक ग्रुप्स में गप्पे मार रहा है। वह किन यूट्यूब चैनल्स पर ज्ञान ले रहा है या फिर वह किन इन्फ्लुएंसर्स की फालतू रील्स देखकर अपना वक्त बर्बाद कर रहा है। अगर आपको यह नहीं पता तो आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं और सच कहूं तो आपका तीर खुद आपकी ही आंख में लगने वाला है। आपको एक प्रॉपर अवतार बनाना होगा। उसका नाम रखिये। उसकी उम्र तय कीजिये। यह देखिये कि उसे रात को नींद क्यों नहीं आती। जब तक आप अपने कस्टमर की नस नहीं पकड़ेंगे तब तक आप उसे अपनी दुकान तक नहीं ला पाएंगे।

लोग अक्सर गलती यह करते हैं कि वे सबको अपना सामान बेचना चाहते हैं। भाई आप भगवान नहीं हैं कि सबको खुश कर देंगे। अगर आप सबको बेचने की कोशिश करेंगे तो आप किसी को भी नहीं बेच पाएंगे। आपको अपनी नीश यानी अपने खास इलाके को चुनना होगा। मान लीजिये आप वजन घटाने की दवा बेच रहे हैं। अब आप उन लोगों को ऐड दिखा रहे हैं जो पहले से ही जिम में अपनी हड्डियां तुड़वा रहे हैं। क्या फायदा। आपको उन लोगों को ढूंढना है जो सोफे पर बैठकर चिप्स खाते हुए पतले होने का सपना देख रहे हैं।

सच्चाई तो यह है कि आपका कस्टमर फेसबुक और इंस्टाग्राम की गलियों में आवारागर्दी कर रहा है। आपको बस वहां जाकर एक बड़ा सा बोर्ड लगाना है जो उनकी समस्या का समाधान दे। इसे रसल ब्रन्सन कांग्रीगेशन कहते हैं। जैसे पुराने जमाने में लोग मंदिर या बाजार में इकट्ठे होते थे वैसे ही आज लोग ऑनलाइन ग्रुप्स में जमा हैं। आपको बस यह पहचानना है कि आपका कस्टमर किस मंदिर का भक्त है। एक बार आपने उसे ढूंढ लिया तो समझो आधा काम हो गया। बाकी का आधा काम उसे अपनी तरफ खींचना है जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे। पर पहले यह तो तय कर लो कि आप शिकार करने जा रहे हैं या खुद शिकार बनने।


लेसन २ : ड्रीम हंड्रेड स्ट्रेटजी यानी दूसरों की मेहनत पर राज करना

अब जब आपने जान लिया है कि आपका कस्टमर कौन है और कहां छुपा है तो अब क्या करेंगे। क्या आप एक एक आदमी के पास जाकर भीख मांगेंगे कि भैया मेरी वेबसाइट देख लो। अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आपकी मेहनत रंग लाए या न लाए पर आप थककर चूर जरूर हो जाएंगे। यहाँ काम आती है ड्रीम हंड्रेड स्ट्रेटजी। यह स्ट्रेटजी इतनी सिंपल है कि एक छोटा बच्चा भी समझ जाए पर अफसोस आप जैसे बड़े लोग इसे इग्नोर कर देते हैं। रसल कहते हैं कि आपको उन सौ लोगों की लिस्ट बनानी है जिनके पास आपके ड्रीम कस्टमर्स पहले से ही जमावड़ा लगाकर बैठे हैं।

इसे ऐसे समझिये कि आप एक नई मिठाई की दुकान खोलना चाहते हैं। अब या तो आप सड़क पर खड़े होकर चिल्लाएं या फिर उस शहर के सबसे बड़े स्कूल के प्रिंसिपल से दोस्ती कर लें। क्योंकि आपको पता है कि स्कूल के बच्चों को मिठाई पसंद है और प्रिंसिपल के पास उन सबका एक्सेस है। यही जादू है ड्रीम हंड्रेड का। आपके कस्टमर जिन यूट्यूबर्स को फॉलो करते हैं या जिन ब्लॉग्स को पढ़ते हैं वे आपके लिए सोने की खान हैं। आपको खुद का ट्रैफिक बनाने की जरूरत ही नहीं है। आपको बस उन सौ लोगों के साथ रिश्ते बनाने हैं जो पहले से ही उस ट्रैफिक के मालिक बने बैठे हैं।

लेकिन यहाँ लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं। वे सीधा जाकर उन बड़े इन्फ्लुएंसर्स को मैसेज करते हैं कि भाई मेरा लिंक प्रमोट कर दो। यह वैसा ही है जैसे आप किसी अजनबी की शादी में घुसकर कहें कि मुझे भी खाना खिला दो। कोई आपको भाव नहीं देगा और शायद धक्के मारकर बाहर निकाल दे। आपको पहले वैल्यू देनी होगी। उनके पोस्ट्स पर कमेंट कीजिये। उनके काम की तारीफ कीजिये। उनके लिए कुछ ऐसा कीजिये जिससे उनका काम आसान हो जाए। जब आप उनके रडार पर आ जाएंगे तब वे खुद आपके लिए दरवाजे खोल देंगे।

सच तो यह है कि इंटरनेट पर सारा ट्रैफिक रेंटेड यानी किराए का है। फेसबुक और गूगल आपको अपना कस्टमर सिर्फ तब तक दिखाते हैं जब तक आप उन्हें मोटा पैसा खिलाते हैं। जैसे ही पैसा खत्म वैसे ही ट्रैफिक खत्म। लेकिन अगर आप इन सौ दिग्गजों के साथ अच्छे संबंध बना लेते हैं तो आपको बार बार पैसे फूंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप उनकी ऑडियंस के सामने बार बार आ सकते हैं। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि सीधा सा दिमाग है। लोग उन पर भरोसा करते हैं और अगर वे आपकी तरफ इशारा कर दें तो वह भरोसा आपके पास शिफ्ट हो जाता है। यह रास्ता थोड़ा लंबा लग सकता है पर यकीन मानिए यह सबसे पक्का रास्ता है। वरना तो आप एड्स मैनेजर की स्क्रीन देख देख कर बूढ़े हो जाएंगे और हाथ कुछ नहीं आएगा।


लेसन ३ : रेंटेड ट्रैफिक को अपना बनाना और उसे कंट्रोल करना

अब तक आपने कस्टमर को ढूंढ लिया और बड़े खिलाड़ियों से हाथ भी मिला लिया। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कल को मार्क जुकरबर्ग का मूड खराब हो गया और उसने आपका फेसबुक अकाउंट बंद कर दिया तो आप क्या करेंगे। या फिर गूगल ने अपना एल्गोरिदम बदल दिया और आपकी वेबसाइट को सर्च रिजल्ट्स से गायब कर दिया तब आप कहां जाएंगे। रसल ब्रन्सन बड़ी कड़वी बात कहते हैं कि अगर आप सिर्फ सोशल मीडिया के भरोसे बैठे हैं तो आप एक ऐसी जमीन पर महल बना रहे हैं जिसके मालिक आप नहीं हैं। जिस दिन असली मालिक ने लात मारी आपका सारा बिजनेस मिट्टी में मिल जाएगा।

ट्रैफिक के तीन प्रकार होते हैं। पहला वह ट्रैफिक जिसे आप कंट्रोल करते हैं यानी एड्स। आप पैसा देते हैं और लोग आपकी साइट पर आते हैं। दूसरा वह ट्रैफिक जिसे आप कंट्रोल नहीं करते यानी सोशल मीडिया की रील्स या गूगल सर्च। यहाँ आप किस्मत के भरोसे बैठे रहते हैं कि शायद कोई वीडियो वायरल हो जाए। लेकिन सबसे कीमती होता है तीसरा प्रकार यानी वह ट्रैफिक जिसके मालिक आप खुद हैं। यह आपकी ईमेल लिस्ट या आपके कस्टमर्स का डेटा है। जब तक आप लोगों को फेसबुक से खींचकर अपनी लिस्ट में नहीं लाते तब तक आप सिर्फ एक किराएदार हैं।

असली खेल तब शुरू होता है जब आप लोगों को एक लालच देते हैं जिसे मार्केटिंग की भाषा में लीड मैग्नेट कहते हैं। उन्हें कुछ फ्री में दीजिये। कोई ईबुक या कोई चेकलिस्ट। बदले में उनका ईमेल आईडी मांग लीजिये। अब आपके पास एक ऐसी ताकत है कि आप जब चाहें एक बटन दबाकर हजारों लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। इसके लिए आपको किसी फेसबुक को एक रुपया भी देने की जरूरत नहीं है। इसे कहते हैं ट्रैफिक ओन करना। जितने बड़े आपके ईमेल की लिस्ट होगी उतनी ही बड़ी आपकी तिजोरी होगी।

आज के जमाने में लोग फालोअर्स के पीछे भाग रहे हैं। पर सच तो यह है कि फालोअर्स सिर्फ एक नंबर हैं जो आपको ईगो बूस्ट दे सकते हैं पर बैंक बैलेंस नहीं। अगर आपके पास एक लाख फालोअर्स हैं पर एक भी ईमेल एड्रेस नहीं है तो आप बहुत बड़े खतरे में हैं। आपको हर उस इंसान को जो आपकी वेबसाइट पर आ रहा है उसे अपनी लिस्ट में बदलने की कोशिश करनी चाहिए। यही वह सीक्रेट है जो रसल ब्रन्सन को और दुनिया के बड़े मार्केटर्स को करोड़पति बनाता है। वे ट्रैफिक खरीदते हैं और उसे हमेशा के लिए अपना बना लेते हैं। अब फैसला आपका है कि आप जिंदगी भर रेंट भरते रहना चाहते हैं या खुद का एक डिजिटल साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं।


ट्रैफिक कोई जादू नहीं है बल्कि एक साइंस है। अगर आप आज भी वही पुरानी गलतियां कर रहे हैं तो रुक जाइए। अपनी स्ट्रेटजी बदलिए। अपने ड्रीम कस्टमर को पहचानिए और उन्हें अपना बना लीजिये। अगर आप वाकई में अपने बिजनेस को ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं तो आज ही अपनी ड्रीम हंड्रेड लिस्ट बनाना शुरू करें। कमेंट में बताएं कि आपको इन ३ लेसन्स में से सबसे अच्छा कौन सा लगा और इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो ऑनलाइन बिजनेस में स्ट्रगल कर रहे हैं। आपकी एक छोटी सी शुरुआत बड़े बदलाव ला सकती है।

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