क्या आप अभी भी वही घिसे पिटे एम्प्लॉई बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ घड़ी देखकर काम खत्म करते हैं। मुबारक हो। आप अपने करियर को धीरे धीरे खत्म कर रहे हैं और आपको पता भी नहीं है। जब इम्पैक्ट प्लेयर्स प्रमोशन की मलाई खा जाएंगे तब आप ऑफिस के कोने में बैठकर अपनी किस्मत को कोसते रहिएगा।
आज की भागदौड़ वाली दुनिया में सिर्फ मेहनत करना काफी नहीं है। आपको गेम बदलना सीखना होगा। लिज वाइसमैन की किताब इम्पैक्ट प्लेयर्स हमें बताती है कि कैसे हम अपनी वैल्यू को दस गुना बढ़ा सकते हैं। चलिए इस आर्टिकल में उन 3 जादुई लेसन्स को समझते हैं जो आपके करियर की गाड़ी को सुपरफास्ट बना देंगे।
लेसन १ : असली प्रॉब्लम को पहचानिए और उसे जड़ से मिटाइए
क्या आप उन लोगों में से हैं जो सिर्फ उतना ही काम करते हैं जितना उनके जॉब डिस्क्रिप्शन में लिखा होता है। अगर हां तो बधाई हो। आप एक बेहतरीन रोबोट बन चुके हैं। पर अफसोस की बात यह है कि कंपनी को रोबोट नहीं इम्पैक्ट प्लेयर्स चाहिए। इम्पैक्ट प्लेयर वह नहीं होता जो सिर्फ पसीना बहाता है। वह वह होता है जो असली कचरे को पहचानता है और उसे साफ करता है। सोचिए आपके ऑफिस में एक ऐसी समस्या है जिससे हर कोई परेशान है। सब लोग उसके बगल से ऐसे गुजर जाते हैं जैसे वह कोई सडक पर पड़ा हुआ पत्थर हो। एक साधारण एम्प्लॉई सोचेगा कि यह मेरा काम नहीं है। लेकिन एक इम्पैक्ट प्लेयर वहां रुकता है। वह उस पत्थर को उठाता है और रास्ते से हटा देता है।
मान लीजिए आपके ऑफिस की किचन में नल खराब है और पानी टपक रहा है। एक एवरेज एम्प्लॉई आएगा। अपना कप धोएगा। गीले फर्श पर फिसलेगा और गालियां देते हुए अपनी डेस्क पर वापस चला जाएगा। वह बॉस को ईमेल भी कर सकता है कि नल खराब है। लेकिन एक इम्पैक्ट प्लेयर क्या करेगा। वह प्लंबर को फोन नहीं करेगा। वह शायद खुद एक टेप लगाएगा या तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक वह पानी रुक न जाए। क्यों। क्योंकि वह जानता है कि टपकता पानी सिर्फ पानी की बर्बादी नहीं है। वह पूरे ऑफिस का मूड और प्रोडक्टिविटी खराब कर रहा है। वह उस काम को अपना काम बना लेता है जिसे कोई और हाथ नहीं लगाना चाहता।
करियर में आगे बढ़ने का सबसे बड़ा सीक्रेट यही है। अपनी आंखें खुली रखिए। देखिए कि आपके बॉस को किस बात की चिंता सता रही है। अगर आप वह काम कर देते हैं जो बॉस के लिए सिरदर्द बना हुआ है तो आप उनकी नजर में हीरो बन जाएंगे। लोग अक्सर अपनी मेहनत का ढिंढोरा पीटते हैं पर वे वह काम नहीं करते जिसकी जरूरत होती है। वे अपनी पूरी ताकत उस दिशा में लगा देते हैं जिसका कंपनी के लिए कोई मतलब नहीं होता। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप किसी रेस में बहुत तेज भाग रहे हों लेकिन गलत दिशा में। इम्पैक्ट प्लेयर पहले दिशा देखता है। वह समझता है कि असली खेल कहाँ चल रहा है।
जब आप वह जिम्मेदारी उठाते हैं जो किसी ने आपको नहीं दी तो आप एक लीडर की तरह दिखने लगते हैं। यह सार्काज्म नहीं बल्कि कड़वा सच है कि आधे से ज्यादा लोग सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे परमिशन का इंतजार करते हैं। इम्पैक्ट प्लेयर परमिशन नहीं मांगता। वह रिजल्ट लाकर देता है। वह जानता है कि जब काम पूरा हो जाएगा तब कोई यह नहीं पूछेगा कि तुमने यह क्यों किया। बल्कि सब उसे शाबाशी देंगे। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको गंभीरता से लें तो उन समस्याओं को हल करना शुरू करें जो दूसरों को डराती हैं। इससे आपकी वैल्यू मार्केट में और ऑफिस में रातों रात बढ़ जाएगी। याद रखिए। दुनिया सिर्फ मेहनत करने वालों को नहीं बल्कि फर्क पैदा करने वालों को याद रखती है।
लेसन २ : बिना किसी के कहे कमान संभालना सीखिए
जब ऑफिस में कोई नया प्रोजेक्ट आता है और चारों तरफ सन्नाटा छा जाता है तब आप क्या करते हैं। क्या आप अपनी डेस्क के नीचे छुपने की कोशिश करते हैं ताकि बॉस की नजर आप पर न पड़े। अगर आपका जवाब हां है तो आप एक परफेक्ट अंडरपरफॉर्मर हैं। ज्यादातर लोग जिम्मेदारी से ऐसे भागते हैं जैसे वह कोई संक्रामक बीमारी हो। लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर इसी सन्नाटे का इंतजार करता है। जब सिचुएशन खराब होती है और किसी को समझ नहीं आता कि क्या करना है तब वह इंसान खड़ा होता है और कहता है कि मैं इसे संभाल लूँगा। यह कोई जादू नहीं है। यह सिर्फ एक चॉइस है।
सोचिए एक ऐसी मीटिंग चल रही है जहाँ क्लाइंट गुस्से में चिल्ला रहा है। प्रोजेक्ट मैनेजर के पसीने छूट रहे हैं और बाकी टीम मेंबर्स अपनी पेन से डायरी पर चित्र बना रहे हैं। माहौल ऐसा है जैसे किसी ने बम रख दिया हो। एक साधारण इंसान सोचेगा कि शुक्र है मैं इस प्रोजेक्ट का लीड नहीं हूँ। पर इम्पैक्ट प्लेयर वहां बीच में कूदता है। वह सिचुएशन को शांत करता है। वह क्लाइंट की बात सुनता है और एक प्लान पेश करता है। वह उस समय लीडर बन जाता है जब वहां कोई लीडर मौजूद नहीं होता। और सबसे मजेदार बात पता है क्या है। जैसे ही वह मुश्किल खत्म होती है वह चुपचाप वापस अपनी जगह पर जाकर बैठ जाता है। वह अपना ईगो बीच में नहीं लाता।
इम्पैक्ट प्लेयर्स को पता होता है कि लीडरशिप कोई पोस्ट या पद नहीं है। यह एक व्यवहार है। वे जानते हैं कि जब रास्ता धुंधला हो तब हाथ में टॉर्च लेकर आगे बढ़ना ही असली बहादुरी है। वे परमिशन मिलने का इंतजार नहीं करते कि कोई आकर उनके कंधे पर हाथ रखेगा और कहेगा कि जाओ बेटा दुनिया जीत लो। वे खुद अपनी दुनिया बनाते हैं। जो लोग हमेशा यह पूछते रहते हैं कि क्या मैं यह कर सकता हूँ वे असल में अपनी जिम्मेदारी किसी और पर डाल रहे होते हैं। इम्पैक्ट प्लेयर जिम्मेदारी मांगता नहीं है। वह उसे छीन लेता है।
मान लीजिए आपके ऑफिस में अचानक इंटरनेट बंद हो गया। आधे लोग तो खुश हो जाएंगे कि चलो अब काम नहीं करना पड़ेगा और चाय पीने चले जाएंगे। कुछ लोग आईटी डिपार्टमेंट को गालियां देंगे। लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर अपना मोबाइल हॉटस्पॉट ऑन करेगा। वह देखेगा कि कौन सा काम सबसे जरूरी है और उसे पूरा करने का जुगाड़ ढूंढेगा। वह समस्याओं के बारे में रोता नहीं है। वह समाधान का हिस्सा बनता है। यही वह एटीट्यूड है जो आपको भीड़ से अलग करता है।
जब आप अनिश्चितता में कमान संभालते हैं तो आप कंपनी के लिए अनमोल बन जाते हैं। लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि जब सब फेल हो जाएंगे तब आप ही नाव को किनारे लगाएंगे। यह फिल्म के उस हीरो जैसा है जो आखिरी सीन में आता है और सबको बचा लेता है। बस फर्क इतना है कि यहाँ आपको कोई मेकअप या स्क्रिप्ट नहीं मिलती। आपको अपनी स्क्रिप्ट खुद लिखनी पड़ती है। अगर आप चाहते हैं कि आपके करियर का ग्राफ सीधा ऊपर जाए तो जिम्मेदारी से डरना छोड़िए। जिस काम से सब भाग रहे हों उसे अपनी ताकत बना लीजिए। फिर देखिए कैसे दुनिया आपके पीछे भागती है।
लेसन ३ : हमेशा सीखने के लिए तैयार रहिए और खुद को बदलिए
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एक बार ट्रेनिंग खत्म होने के बाद अपनी किताब और दिमाग दोनों बंद कर देते हैं। अगर आपको लगता है कि कॉलेज की डिग्री आपको पूरी जिंदगी पालती रहेगी, तो शायद आप एक खूबसूरत सपने में जी रहे हैं। सच तो यह है कि दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि अगर आप कल के तरीके आज इस्तेमाल करेंगे, तो परसों तक आप आउटडेटेड हो जाएंगे। इम्पैक्ट प्लेयर वह नहीं है जिसे सब कुछ आता है, बल्कि वह है जो सब कुछ सीखने का दम रखता है। वह जानता है कि फ्लेक्सिबल होना ही असली ताकत है।
मान लीजिए आपके ऑफिस में कोई नया सॉफ्टवेयर आया है। जो पुराने लोग हैं, वे रोना शुरू कर देंगे कि इसकी क्या जरूरत थी, पहले वाला ही अच्छा था। वे उस सॉफ्टवेयर को सीखने की जगह उसमें कमियां ढूंढने में अपनी पूरी एनर्जी लगा देंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक टचस्क्रीन फोन मिलने पर उसे गुस्से में पटक दें क्योंकि आपको बटन दबाने की आदत है। लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर वहां अलग चमकता है। वह सबसे पहले उस सॉफ्टवेयर का ट्यूटोरियल देखेगा। वह गलतियां करेगा, वह खुद को बेवकूफ जैसा महसूस होने देगा, लेकिन वह हार नहीं मानेगा। कुछ ही दिनों में वह उस नई चीज का एक्सपर्ट बन जाएगा और पूरी टीम उसके पास मदद के लिए आएगी।
सीखने का मतलब सिर्फ नई टेक्नोलॉजी नहीं है। इसका मतलब फीडबैक लेना भी है। साधारण लोगों को जब उनकी गलती बताई जाती है, तो वे उसे दिल पर ले लेते हैं। वे ऐसे रिएक्ट करते हैं जैसे किसी ने उनकी किडनी मांग ली हो। वे बहाने बनाएंगे, दूसरों पर इल्जाम लगाएंगे और सारा दिन मुंह फुलाकर घूमेंगे। इम्पैक्ट प्लेयर का स्टाइल अलग है। वह फीडबैक को एक गिफ्ट की तरह लेता है। वह पूछता है कि मैं इसे अगली बार और बेहतर कैसे कर सकता हूं। उसे अपनी इज्जत से ज्यादा अपने काम की क्वालिटी की फिक्र होती है। वह जानता है कि सुधार का रास्ता आलोचना की गलियों से होकर ही गुजरता है।
एक इम्पैक्ट प्लेयर हमेशा स्टूडेंट बना रहता है। उसे फर्क नहीं पड़ता कि वह जूनियर है या सीनियर। वह एक छोटे इंटर्न से भी कुछ नया सीखने में शर्म महसूस नहीं करता। करियर की रेस में वह इंसान कभी नहीं हारता जो झुकना और बदलना जानता है। अगर आप एक पत्थर की तरह सख्त रहेंगे, तो कोई भी हथौड़ा आपको तोड़ देगा। लेकिन अगर आप पानी की तरह बनेंगे, तो आप हर सांचे में ढल जाएंगे और अपनी जगह खुद बना लेंगे।
याद रखिए, आपकी पिछली कामयाबी इस बात की गारंटी नहीं है कि आप आगे भी कामयाब रहेंगे। आपको हर दिन खुद को फिर से साबित करना होगा। जब आप खुद को अपडेट करते रहते हैं, तो आप अपनी कंपनी के लिए एक ऐसे एसेट बन जाते हैं जिसे कोई खोना नहीं चाहता। तो अपनी जिद्द छोड़िए और बदलाव को गले लगाइए। आज का नया लेसन ही आपकी कल की सबसे बड़ी जीत बनेगा।
इम्पैक्ट प्लेयर बनना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह सिर्फ एक नजरिया है। चाहे वह मुश्किलों को सुलझाना हो, बिना कहे जिम्मेदारी लेना हो, या खुद को लगातार बेहतर बनाना हो। ये छोटी छोटी चीजें ही आपको एक एवरेज एम्प्लॉई से एक लेजेंडरी परफॉर्मर बनाती हैं। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप सिर्फ भीड़ का हिस्सा बनकर रहना चाहते हैं या वह बनना चाहते हैं जिसके बिना भीड़ अधूरी है।
नीचे कमेंट्स में बताइए कि इन 3 लेसन्स में से आप कल से अपने काम में कौन सा अपनाने वाले हैं। अपने उस दोस्त को भी यह आर्टिकल शेयर करें जो अपने करियर में फंसा हुआ महसूस कर रहा है। चलिए, साथ मिलकर इम्पैक्ट पैदा करते हैं।
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