CEO Excellence (Hindi)


क्या आप भी अपनी कंपनी के बॉस बनकर सिर्फ आर्डर देना चाहते है और सोचते है कि आप एक ग्रेट लीडर है। अगर हाँ तो बधाई हो आप कंपनी को डुबाने की राह पर सबसे आगे खडे है। बिना सही माइंडसेट के लीडर बनना मतलब बिना पेट्रोल के गाडी चलाना है।

सीईओ एक्सीलेंस बुक के लेखक कैरोलिन डीवर, स्कॉट केलर और विक्रम मल्होत्रा ने दुनिया के सबसे सफल टॉप लीडर्स पर रिसर्च करके छह अनोखे माइंडसेट खोजे है। आइए जानते है वो तीन बडे लेसन जो आपको एक आम मैनेजर से महान सीईओ बना सकते है।


लेसन १ : डायरेक्शन सेट करना और बोल्ड होना

क्या आपने कभी सोचा है कि एक नॉर्मल मैनेजर और एक कमाल के सीईओ में क्या फर्क होता है। एक नॉर्मल मैनेजर सोचता है कि चलो अगले महीने सेल दस परसेंट बढा लेते है। बस काम खत्म। लेकिन एक महान सीईओ यह कभी नहीं सोचता। कैरोलिन डीवर और उनके साथियों ने अपनी रिसर्च में पाया कि बेस्ट लीडर्स कभी छोटे छोटे बदलावों के पीछे नहीं भागते। उनका माइंडसेट बहुत बडा और बोल्ड होता है। वे कंपनी का पूरा नक्शा बदलने के लिए तैयार रहते है।

इसको एक सीधे एग्जांपल से समझते है। मान लीजिए आपकी एक समोसे की दुकान है। अब एक आम दुकानदार क्या सोचेगा। वह सोचेगा कि कल समोसे में थोडा आलू ज्यादा डाल दूंगा या दुकान के बाहर एक नया बोर्ड लगा दूंगा। इससे शायद दो चार ग्राहक बढ जाए। लेकिन अगर वहाँ कोई एक्सीलेंट माइंडसेट वाला लीडर आ जाए तो वह कहेगा कि मुझे सिर्फ समोसे नहीं बेचने। मुझे पूरे देश में समोसे की चेन खोलनी है और मैकडोनाल्ड्स को टक्कर देनी है। इसे कहते है बोल्ड होना। महान लीडर्स यथास्थिति से कभी संतुष्ट नहीं होते। वे हमेशा बडी पिक्चर देखते है।

लेकिन हमारे यहाँ दिक्कत क्या है। ज्यादातर लोग रिस्क लेने से डरते है। वे सोचते है कि जितना चल रहा है उतना ही ठीक है। ज्यादा बडा सोचेंगे तो नुकसान हो जाएगा। पर सच तो यह है कि बिजनेस की दुनिया में सबसे बडा रिस्क कोई रिस्क ना लेना ही है। जब आप कुछ बडा नहीं सोचते तो आप धीरे धीरे पीछे छूट जाते है। बेस्ट सीईओ जानते है कि अगर मार्केट में टिके रहना है तो आपको हर दिन कुछ नया और बडा करना होगा। वे अपनी टीम को भी यही सिखाते है कि डरो मत और आगे बढो।

महान लीडर्स सिर्फ हवा में बातें नहीं करते। वे अपने बडे विजन को सच करने के लिए कडे फैसले भी लेते है। अगर कोई प्रोडक्ट काम नहीं कर रहा तो उसे तुरंत बंद कर देते है। अगर कोई नई टेक्नोलॉजी आई है तो उसे सबसे पहले अपनाते है। वे जानते है कि रास्ता मुश्किल होगा पर वे डरकर पैर पीछे नहीं खींचते। उनका यही एक फैसला पूरी कंपनी की किस्मत बदल देता है।

जब लीडर खुद इतना बोल्ड होता है तो पूरी टीम में एक अलग ही एनर्जी आ जाती है। लोग सिर्फ नौकरी करने नहीं आते बल्कि एक बडे मिशन का हिस्सा बनने आते है। यही वह पहला माइंडसेट है जो एक साधारण इंसान को दुनिया का सबसे बेहतरीन लीडर बना देता है। जब तक आप अपनी सोच का दायरा बडा नहीं करेंगे तब तक आप लीडरशिप की रेस में सबसे पीछे ही रहेंगे। इसलिए अगर लीडर बनना है तो आज ही से बडा सोचना शुरू कीजिए।


लेसन २ : आर्गेनाइजेशन को अलाइन करना और कल्चर बनाना

अब मान लेते है कि आपने बहुत बडा सोच लिया और मैकडोनाल्ड्स को टक्कर देने का प्लान भी बना लिया। लेकिन अगर आपकी दुकान पर काम करने वाले लडके हर दिन लडाई कर रहे है या समोसे में आलू भरना ही भूल जाते है तो आपका वह बडा विजन धरा का धरा रह जाएगा। कैरोलिन डीवर और उनके साथियों ने अपनी रिसर्च में पाया कि बेस्ट सीईओ सिर्फ कागजों पर स्ट्रेटेजी नहीं बनाते। उनका असली काम होता है पूरी कंपनी को एक धागे में पिरोना। जब तक आपकी टीम आपके विजन से अलाइन नहीं होगी तब तक कोई भी प्लान कामयाब नहीं हो सकता।

मान लीजिए आपके यहाँ शादी का फंक्शन है। अब आपने बहुत बडा टेंट लगवा लिया और सबसे महंगे हलवाई को भी बुला लिया। लेकिन अगर घर के लोग ही आपस में रूठे बैठे है और मेहमानों को पानी पूछने वाला कोई नहीं है तो क्या होगा। शादी का पूरा मजा किरकिरा हो जाएगा। बिजनेस में भी यही होता है। बहुत से लीडर सोचते है कि बडी कंपनी का मतलब सिर्फ बडा ऑफिस और बडा फंड होता है। पर सच तो यह है कि कंपनी वहाँ काम करने वाले लोगो से चलती है। महान लीडर्स सही काम के लिए सही इंसान को चुनते है।

हमारे समाज में एक बहुत बडी गड़बड़ी है। लोग सोचते है कि जो सबसे ज्यादा पढा लिखा है उसे सबसे बडी जिम्मेदारी दे दो। लेकिन बेस्ट सीईओ सिर्फ डिग्री नहीं देखते। वे देखते है कि उस इंसान का एटीट्यूड कैसा है। क्या वह टीम के साथ मिलकर काम कर सकता है। अगर कोई इंसान बहुत टैलेंटेड है पर उसका व्यवहार खराब है तो वह पूरी कंपनी का माहौल बिगाड़ देता है। महान लीडर्स ऐसे लोगो को तुरंत बाहर का रास्ता दिखाते है। वे कंपनी में एक ऐसा कल्चर बनाते है जहाँ हर कर्मचारी खुद को कंपनी का मालिक समझने लगता है।

कल्चर का मतलब यह नहीं है कि ऑफिस में एक टेबल टेनिस बोर्ड लगा दिया या सैटरडे को पार्टी कर ली। असली कल्चर का मतलब होता है भरोसा। जब आपके कर्मचारियों को पता होता है कि उनका लीडर उनके साथ खड़ा है तो वे अपना बेस्ट देने के लिए जान लगा देते है। वे सिर्फ सैलरी के लिए काम नहीं करते बल्कि कंपनी को आगे बढाने के लिए काम करते है। जब पूरी कंपनी एक ही दिशा में सोचती है और एक ही मकसद के लिए काम करती है तो बडी से बडी चुनौती भी आसान हो जाती है।

जो लीडर अपनी टीम को अलाइन नहीं कर पाते वे हमेशा परेशान रहते है। वे सुबह से शाम तक खुद ही सारे काम समेटने में लगे रहते है और अंत में थककर बैठ जाते है। लेकिन एक बेहतरीन सीईओ खुद को फ्री रखता है ताकि वह कंपनी के भविष्य पर काम कर सके। वह अपनी टीम पर भरोसा करता है और उन्हें फैसले लेने की आजादी देता है। यही वो दूसरा माइंडसेट है जो आपकी कंपनी के विजन को हकीकत में बदलता है। जब टीम मजबूत होती है तभी बिजनेस बडा बनता है।


लेसन ३ : टीम और बोर्ड को मैनेज करना

अब आपके पास एक बहुत बड़ा विजन भी है और नीचे काम करने वाली एक बेहतरीन टीम भी है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई। असली परीक्षा तब होती है जब आपको अपने बराबर के या अपने से भी ऊपर बैठे लोगो को संभालना होता है। कैरोलिन डीवर और उनके साथियों की रिसर्च कहती है कि दुनिया के सबसे बेस्ट सीईओ अपनी कोर टीम और कंपनी के बोर्ड मेंबर्स के साथ बहुत मजबूत रिश्ते बनाकर रखते है। अगर आपके टॉप लीडर्स आपस में ही लड़ रहे है तो नीचे की टीम चाहे जितनी अच्छी हो कंपनी आगे नहीं बढ़ सकती।

इसको अपने घर के एक सिंपल एग्जांपल से समझते है। मान लीजिए आपके पास एक बहुत बढ़िया और बड़ी कार है। कार के टायर नए है और पेट्रोल भी फुल है। लेकिन अगर कार के अंदर बैठे दो लोग स्टीयरिंग व्हील को अपनी अपनी तरफ खींचने लगे तो क्या होगा। कार किसी भी वक्त एक्सीडेंट का शिकार हो जाएगी। बहुत सी कंपनियों में यही होता है। वाइस प्रेसिडेंट अपनी चला रहा होता है और डायरेक्टर अपना अलग राग अलाप रहा होता है। एक महान सीईओ का काम यही होता है कि वह इन सभी बड़े और तेज दिमाग वाले लोगो को एक साथ लेकर चले।

हमारे यहाँ लोग सोचते है कि अगर मैं बॉस हूँ तो सब मेरी बात सुनेंगे। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता। जब आप टॉप लेवल पर होते है तो आपके साथ काम करने वाले लोग भी बहुत टैलेंटेड और ईगो वाले होते है। आप उन्हें सिर्फ आर्डर देकर काम नहीं करवा सकते। बेस्ट लीडर्स अपनी कोर टीम के साथ एक टीम प्लेयर की तरह काम करते है। वे उनकी सुनते है और उनके आइडियाज को सम्मान देते है। जब आपकी कोर टीम को लगता है कि उनकी बात सुनी जा रही है तो वे कंपनी के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार हो जाते है।

इसके बाद नंबर आता है कंपनी के बोर्ड मेंबर्स का। बहुत से मैनेजर्स बोर्ड मीटिंग के नाम से ही डर जाते है। उन्हें लगता है कि बोर्ड मेंबर्स सिर्फ उनके काम में कमियां निकालने के लिए बैठे है। लेकिन एक एक्सीलेंट माइंडसेट वाला सीईओ बोर्ड को एक मुसीबत नहीं बल्कि एक बहुत बड़ी ताकत समझता है। वह उनसे चीजें छुपाने की बजाय उन्हें सच बताता है और मुश्किल समय में उनकी सलाह लेता है। जब बोर्ड को आपके ऊपर पूरा भरोसा होता है तो वे आपके बड़े और बोल्ड फैसलों में आपके साथ चट्टान की तरह खड़े रहते है।

जो लीडर अपनी कोर टीम और बोर्ड को मैनेज नहीं कर पाते उनका ज्यादातर समय आंतरिक राजनीति को सुलझाने में ही निकल जाता है। वे बिजनेस बढ़ाने के बारे में सोचने की बजाय यह सोचने में लगे रहते है कि कौन उनके खिलाफ चाल चल रहा है। लेकिन बेस्ट सीईओ इस राजनीति से ऊपर उठकर काम करते है। वे जानते है कि जब तक टॉप लेवल पर एकता और भरोसा नहीं होगा तब तक कंपनी का विजन सिर्फ एक सपना ही रहेगा। इसलिए अगर आपको एक महान लीडर बनना है तो अपने आस पास के लोगो का भरोसा जीतना सीखिए।


तो दोस्तों, यह थे वो तीन बडे लेसन जो आपको एक आम मैनेजर से दुनिया का सबसे बेहतरीन लीडर बना सकते है। लीडरशिप का मतलब सिर्फ एक बडी कुर्सी पर बैठना नहीं है बल्कि एक बडा विजन रखना लोगो को साथ जोडना और सबका भरोसा जीतना है। अब जिम्मेदारी आपकी है। क्या आप भी अपनी सोच को बोल्ड बनाने के लिए तैयार है। आज ही से अपने काम में इन माइंडसेट्स को अपनाइए और अपनी कंपनी को एक नई ऊंचाई पर ले जाइए। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए जो लाइफ में कुछ बडा करना चाहते है। नीचे कमेंट करके बताइए कि आपको कौन सा लेसन सबसे अच्छा लगा।

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